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परिचय के लिए कुछ शब्द
प्राचीन काल से ही संसार में प्राणियों का उदार करने के लिए संत सतगुरु साहिब दया भाव सेअवतरित होते आ रहे हैं।उन्होंने समय-समय पर तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार भिन्न-भिन्न मत भी चलाये। उन के द्वारा देह छोड़ने के बाद उन पंथों के अनुयायियों ने मनमत को अपना लिया और अपने सतगुरु साहिबों के बताये रास्ते से भटकने लगे। उन पन्थों के अनुयायीओं ने किसी भी बुद्धिमान महापुरुष का मार्गदर्शन स्वीकार नहीं किया। मनुष्य का स्वभाव है कि वह सतगुरु की वाणी पर अमल नहीं करता, फिर अपने जैसे प्राणियों की बातों को कौन मानेगा। इस कारण सतगुरु साहिबानों को अलग-अलग समय पर अलग-अलग रूप में मानव रूप में आना पड़ रहा है, ताकि अपने रास्ते से भटक चुकी आत्माओं को उनके वास्तविक घर तक पहुंचाया जा सके। इसी उद्देश्य से हजूर स्वामी जी महाराज ने 1818 ई. में आगरा की धरती पर अवतार लिया और राधा स्वामी मत की शुरूआत हुई।
वर्ष 1878 ई. में हजूर स्वामी जी महाराज द्वारा देह छोड़ने के बाद हजूर बाबा जयमल सिंह जी महाराज ने राधा स्वामी नाम की आध्यात्मिक लौ को और भी रोशन किया। वर्ष 1894 में हजूर बाबा जयमल सिंह जी महाराज ने हजूर बाबा बग्गा सिंह जी महाराज को जानशीनी बख्श दी।
बाबा बग्गा सिंह जी महाराज ने तरनतारन (पंजाब) की धरती पर डेरा स्थापित किया और कई आत्माओं को उस धुर धाम का निवासी बनाया। बाबा बग्गा सिंह जी महाराज सन् 1944 तक अपने भक्तों पर कृपा बरसाते रहे, इस दौरान सन् 1936-37 के दौरान आपने बाबा देवा सिंह जी महाराज को जानशीनी का आशीर्वाद दिया और बाबा देवा सिंह जी महाराज को अपने बराबर आसन बख्श दिया।
हजूर बाबा देवा सिंह जी महाराज 1960 ई. तक प्राणियों पर दया करते रहे। इसी बीच सन् 1955 ई. में हुजूर स्वामी श्री गुरबचन लाल जी महाराज को जानशीनी बख्श दी।
परम पूज्य हजूर स्वामी श्री गुरबचन लाल जी महाराज द्वारा अपनी पैतृक भूमि ध्यानपुर में डेरा बाबा देवा सिंह जी महाराज की स्थापना की। वचन किए कि डेरे के अंदर स्थित मुख्य द्वार से कोई भाग्यशाली व्यक्ति ही गुजरेगा और जिसे वह बुलाएंगे वही आयेगा। सतगुरों ने प्राणियों के समक्ष अपने सतगुरों के प्रति प्रेम का अतुल्य उदाहरण प्रस्तुत किया। खुद मालक सरकार होते हुए, विनम्रता की गहराई तक पहुंच कर, जो काम वह खुद कर रहे थे, उसका सारा श्रेय अपने सतगुरुओं को देते रहे। सतगुरुओं ने कभी यह स्वीकार नहीं किया था कि उनके सतगुरु हजूर बाबा देवा सिंह जी ने महाराज कहीं चले गए हैं। इस लोक के नियमों का पालन करते हुए 1981 ई. में उन्हों ने देह को छोड़ दिया ।
उसके बाद सतगुरुओं के वचनों के अनुसार हुजूर स्वामी श्री बलदेव राज जी महाराज ने सतगुरुओं के रूप में संगत को दर्शन देना प्रारम्भ कर दिया। आपके स्वभाव के बारे में जो कुछ भी कहा जाये वह बहुत कम है। वह करुणा और दया की मिसाल थे। दूसरी पातशाही राधा स्वामी दरबार श्री ध्यानपुर साहिब के रूप में उन्होंने संगत पर अद्भुत कृपा बरसाई। आप ने सतगुरुओं के यह वचन कि:-
“कहा कवियन पर कह नहीं जाना , संत हृदय नवनीत समाना,
निज प्रताप द्रवे नवनीता, पर प्रताप द्रवे संत पुनिता”
सच कर दिखाए। लेकिन 16 सितंबर 2001 को उन्हों ने अपने सरीर को छोड़ दिया।
उसके बाद संगत पर दया करने के लिए वर्तमान स्वरूप हजूर स्वामी श्री विक्रमजीत सिंह जी महाराज ने दर्शन दिए। सतगुरु साहिब जी ने दया दिखाते हुए अपनी दया और कृपा के सारे भंडार खोल दिए हैं। सतगुरुओं के दरबार में परमार्थ का रूहानी और आध्यात्मिक प्रवाह निरंतर चल रहा है। सतगुरु साहिब जी प्राणियों पर दया करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे अपनी सुख-सुविधा, अपनी सहूलियत की परवाह किए बगैर घंटों अपना बहुमूल्य समय संगत के हित में बिताते हैं। सतगुरु के दरबार में जो अद्भुत प्रकाश, आध्यात्मिक और अविश्वसनीय प्रवाह चल रहा है उसको शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता। इसे केवल देखकर ही जाना जा सकता है, इसे केवल महसूस करके ही जाना जा सकता है। इसलिए जिसे भी इन सबकी इच्छा हो, आध्यात्मिक पथ पर चलने की, दर्शन करने की लालसा हो तो उसको ध्यानपुर साहिब की धरती की तरफ ध्यान करना चाहिए।भक्तों को सही मार्ग पर ले जाने के लिए, उनके जीवन पथ को रोशन करने के लिए, हजूर गुरु महाराज वर्तमान स्वरूप श्री ध्यानपुर साहिब, अपने अनमोल वचनों की वर्षा कर रहे हैं। सतगुरु साहिब जी की कृपा से सभी प्रकार के भ्रम दूर हो रहे हैं। सतगुरु जी के दरबार में आई सभी आत्माएं अद्भुत रंग में रंगी जा रही हैं। प्रत्येक रविवार, प्रत्येक माह की संक्रांति तथा सतगुरु साहिब जी के अवतार दिवसों पर सतगुरु साहिब द्वारा सत्संग किया जाता है। सतगुरु साहिब जी प्राणियों के कल्याण के लिए उनके नगरों में जाकर भी सत्संग करते हैं।
यदि कोई अपने अंदर देखना चाहता है, अंदर की बात सुनना चाहता है तो उसे एक बार सतगुरु साहिब जी द्वारा कहे गए सत्संग को सुनना चाहिए, कुछ समय निकालकर अनमोल वचनों को सुनना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए कोई भी सतगुरु जी के दरबार के यू-ट्यूब चैनल “Radha Swami Satsang Dhianpur” की सदस्यता ले सकता है। सतगुरु साहिब जी के वचन सुनने के बाद सारे आंतरिक और बाहरी रहस्य खुल जाते हैं। सतगुरु जी के वचन सुनने से उन प्राणियों की इच्छा पूरी हो सकती है जो अपने अंदर झाँकने की इच्छा रखते हैं। इस कार्य के लिए समय निकालकर सतगुरु डेरा बाबा देवा सिंह जी महाराज श्री ध्यानपुर साहिब तहसील डेरा बाबा नानक जिला गुरदासपुर पंजाब के दरबार में हाजिरी लगाई जा सकती है।